पैराग्वे की मंत्री ने फ्रांसीसी फुटबॉल कप्तान को गाली दी:इंटरव्यू में 'सन ऑफ बिच' कहा; फुटबॉल वर्ल्डकप की 3 कंट्रोवर्सी

फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला के बीच विवाद और गहरा गया है। अमारिला ने अब एम्बाप्पे को पिल्ला (सन ऑफ बिच) कहा है। उन्होंने अपने पहले दिए गए बयानों पर माफी मांगने से इनकार किया है। अमारिला ने बुधवार को स्पेन के अखबार ‘Marca’ से कहा- ‘जब ऑरलैंडो गिल, जो शायद पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहा था और पहली बार यूरोप आया था। दुनिया के सामने पूरी विनम्रता के साथ एक पैराग्वेयन की तरह अपना हाथ बढ़ाता है, तब वह सन ऑफ बिच उससे हाथ मिलाने से इनकार कर देता है। यह फ्रांसीसी संस्कृति नहीं है। कोई भी असली फ्रांसीसी ऐसा कभी नहीं करता।’ अमारिला पहले से एम्बाप्पे पर नस्लीय टिप्पणी को लेकर विश्व स्तर पर आलोचना झेल रही हैं। यह विवाद 5 जुलाई को राउंड ऑफ-16 में फ्रांस की पैराग्वे पर 1-0 की जीत के बाद शुरू हुआ था। मैच के बाद एम्बाप्पे ने पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल से हाथ नहीं मिलाया था। इसके बाद सीनेटर ने उन्हें घमंडी बताते हुए नस्लीय टिप्पणी की थी। पहले एमबाप्पे को घमंडी कहा था अमरिला ने सोशल मीडिया पर एमबाप्पे को लेकर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं। जवाब एमबाप्पे ने उन्हें ‘घृणित महिला’ और ‘अपने पद के अयोग्य’ बताया था। इसके बाद अमारिला ने X पर एक लेटर पोस्ट किया था। इसमें लिखा था कि उनका विरोध सिर्फ एमबाप्पे के व्यवहार से है, फ्रांस से नहीं। अमरिला ने लेटर में लिखा, ‘मैंने बचपन से बड़े होने तक तक फ्रेंच स्कूल में पढ़ाई की है। फ्रेंच बोलती हूं और फ्रांस से मेरा गहरा लगाव है। पिछले साल फ्रांस में ही परिवार के साथ क्रिसमस मनाया था। इसलिए मेरा विवाद फ्रांस से नहीं, बल्कि तुम्हारे घमंडी रवैये से है।’ पैराग्वे की सरकार ने अमारिला के बयान की निंदा की पैराग्वे सरकार ने 7 जुलाई को फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे के खिलाफ सीनेटर अमारिला की टिप्पणी की कड़ी निंदा की। कहा कि यह बयान उन मूल्यों और सिद्धांतों के विपरीत हैं, जिनका पालन हमारा देश करता है। वर्ल्ड कप के 2 अन्य विवाद भी पढ़िए… 1. ट्रम्प के फोन पर रेड कार्ड रद्द ट्रम्प के फोन पर बालोगुन का बैन हटाने पर FIFA प्रेसिडेंट घिरे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का वर्ल्ड कप बैन हटाने के फैसले पर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लंदन के मानवाधिकार संगठन फेयरस्क्वेयर ने उनके खिलाफ इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) के एथिक्स कमीशन में शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि इन्फैन्टिनो ने ओलिंपिक चार्टर के राजनीतिक निष्पक्षता नियम का उल्लंघन किया है। IOC मेंबर होने के नाते उन पर राजनीतिक तटस्थता संबंधी नियम लागू होते हैं। फेयरस्क्वेयर ने दिसंबर 2025 में भी उनकी शिकायत फीफा की एथिक्स कमेटी से की थी। तब भी उन पर राजनीतिक निष्पक्षता के उल्लंघन के आरोप लगे थे। हालांकि, उस मामले में कोई आधिकारिक अपडेट नहीं दिया गया। ट्रम्प ने बैन हटाने का दावा किया था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 जुलाई को दावा किया कि उनके फोन के बाद फीफा ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का एक मैच का बैन हटा दिया। बालोगुन को पिछले नाकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, इसलिए उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मैच से बाहर रहना चाहिए था। लेकिन फीफा की अनुशासन समिति ने उनका प्रतिबंध हटाकर उन्हें खेलने की अनुमति दी। इसके बावजूद अमेरिका को बेल्जियम के खिलाफ 4-1 से हार का सामना करना पड़ा। IOC प्रेसिडेंट कोवेंट्री बोली- शिकायत मिली तो जांच करेंगे IOC अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री ने कहा कि यदि इस मामले में औपचारिक शिकायत मिलती है तो एथिक्स कमीशन इसकी जांच करेगा। उन्होंने कहा कि IOC पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि अमेरिका 2028 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक की भी मेजबानी करेगा। 2. अर्जेंटीना मैच में रेफरशिप विवाद EFA ने रेफरी को हटाने की मांग की प्री-क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना से 3-2 की हार के बाद इजिप्ट फुटबॉल संघ (EFA) ने रेफरी पर कार्रवाई की मांग की है। उसने मैच की रेफरिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई फैसलों ने मुकाबले का रुख बदल दिया और वह इस मामले पर चुप नहीं रह सकता। वहीं, फीफा ने रेफरी के फैसलों का बचाव करते हुए अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना गलत बताया। आरोप है कि रेफरी ने 58वें मिनट वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने VAR रिव्यू के बाद मारवान अटिया का गोल फाउल मानकर रद्द कर दिया था। टीम के हेड कोच होसम हसन ने अर्जेंटीना की जीत के बाद हाथों से ‘X’ का इशारा कर विरोध दर्ज कराया था। ————————————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 32 साल बाद 6 यूरोपियन टीमें क्वार्टर फाइनल में, एशिया की कोई टीम नहीं 2026 फीफा वर्ल्ड कप अब अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इस बार के क्वार्टर फाइनल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 32 साल बाद अंतिम-8 में 6 यूरोपियन (यूएफा) टीमों ने अपनी जगह बनाई है। पढ़ें पूरी खबर

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