अलीगढ़ में घंटाघर से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाला मार्च, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
अलीगढ़। उच्च शिक्षा, सामाजिक न्याय, आरक्षण व्यवस्था, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार 18 अगस्त को अलीगढ़ में विभिन्न सामाजिक एवं जातीय संगठनों के पदाधिकारियों ने बैठक कर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके बाद अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र पाल सिंह के नेतृत्व में संगठनों के प्रतिनिधियों ने घंटाघर स्थित ठाकुर मलखान वाटिका से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा, बैनर और विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर नारेबाजी की।
मार्च के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसीएम के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के प्रस्तावित/नए प्रावधानों की समीक्षा, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के गठन समेत कई मांगें उठाईं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रामवीर सिंह ने की। वक्ताओं ने कहा कि सभी संगठनों का संविधान की मूल भावना न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता में विश्वास है तथा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है।
यूजीसी नियमों को लेकर जताई आपत्ति
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने यूजीसी से जुड़े वर्ष 2026 के नियमों पर आपत्ति जताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने अथवा व्यापक पुनरावलोकन कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों और संस्थागत व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ प्रावधान सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए समान स्तर की स्पष्ट सुरक्षा और प्रभावी प्रतिकार व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करते।
उन्होंने कहा कि व्यापक या अस्पष्ट प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका को दूर किया जाना चाहिए और किसी भी वर्ग के विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी के साथ जाति अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सभी के लिए समान शिकायत निवारण व्यवस्था की मांग
हिंदू युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजू गौड़ ने कहा कि समानता के सिद्धांत के तहत सभी नागरिकों को समान संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, समुदाय या सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं किए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता और शिकायत से प्रभावित व्यक्ति, दोनों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए निष्पक्ष राष्ट्रीय शिकायत निवारण मॉडल विकसित किया जाना चाहिए।
आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग
करणी सेना भारत के राष्ट्रीय सचिव लोकेश जादौन ने आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य कमजोर और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाना था। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
बैठक में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव और लाभार्थियों की स्थिति का समय-समय पर अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय सवर्ण आयोग बनाने की मांग
दिनेश चंद्र सक्सेना ने राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और रोजगार संबंधी मुद्दों का अध्ययन करने तथा जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
सामाजिक समरसता एवं संवाद परिषद का प्रस्ताव
राष्ट्रीय करणी सेना के करण ठाकुर ने प्रधानमंत्री कार्यालय अथवा संबंधित मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सामाजिक समरसता एवं संवाद परिषद गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस परिषद में विभिन्न सामाजिक समूहों, शिक्षकों, युवाओं, पूर्व सैनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिष्ठित नागरिकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है।
उनके अनुसार परिषद का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष का प्रतिनिधित्व करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान, सामाजिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना होना चाहिए।
एससी-एसटी कानून के कथित दुरुपयोग पर रोक की मांग
किसान मजदूर संगठन के बंटी जादौन ने एससी-एसटी कानून के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के कई संगठनों में झूठी शिकायतों को लेकर असंतोष है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी शिकायत की जांच में वह जानबूझकर झूठी पाई जाती है तो कानून के अनुसार संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
‘एक राष्ट्र, एक पहचान’ अभियान की मांग
रामरक्षपाल सिंह सेंगर ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालीन राष्ट्रीय जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभियान का संदेश “समान अधिकार, समान सम्मान, समान अवसर—मजबूत भारत की पहचान” होना चाहिए।
उन्होंने विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, पूर्व सैनिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं को ऐसे अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अमित सारस्वत ने कहा कि यदि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई तथा प्रतिनिधिमंडल से संवाद स्थापित नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह यदुवंशी, आरपी सिंह, गौरी पाठक, स्नेहलता चौहान, रेखा राजपूत, मुकेश रावल, हर्षवर्धन सिंह, सोनू ठाकुर, कृष्णा ठाकुर, जितेंद्र नारायण उपाध्याय, वेदप्रकाश सिंह, राहुल सेंगर, राकेश सेंगर, ब्रजेश सेंगर एडवोकेट, रमेश सिंह, गिरीश प्रधान, रोहित सिंह, धीरू पहलवान, कौशल सिंह, मुकेश सिंह, विकास सिंह, मनोज कुमार सिंह, रोहित सिंह, दक्ष कुमार सिंह, गजेंद्र सिंह, संजीव कुमार सिंह, रॉबिन सिंह, अजय सिंह, जितेंद्र राघव, डैनी ठाकुर, संदीप चौहान, भूपेंद्र सिंह, चमन सिंह, आलोक चौहान, अखिलेश तोमर, गोविंद सिंह, विजय ठाकुर, राजेश भाल, अतुल पंडित सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने “न्याय सबके लिए, सम्मान सबका, राष्ट्र सर्वोपरि” का संदेश देते हुए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही।

