जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे:9 महीने तक जोड़ीदार तलाशते रहे, अब तक की सबसे लंबी दूरी तय की

साथी की तलाश में जाम्बिया के तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने करीब 4,126 किलोमीटर का सफर तय किया। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक ये तीनों भाई 2025 के बीच में अपने पुराने इलाके से निकले और करीब 9 महीने तक लगातार घूमते रहे। अप्रैल 2026 तक उन्होंने यह दूरी पूरी कर ली थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन पर रहने वाले किसी अफ्रीकी स्तनधारी के साथी की तलाश में दर्ज की गई यह अब तक की सबसे लंबी दूरी है। इन तीनों को मायुकुयुकु मेल्स (Mayukuyuku males) के नाम से पहचाना गया है। उनका सफर सिर्फ लंबा नहीं था, बल्कि बेहद मुश्किल भी था। रास्ते में उन्हें जंगलों के साथ-साथ सड़कें, शहर, खेती और औद्योगिक इलाके भी मिले। वे इनसे बचते हुए बार-बार अपना रास्ता बदलते रहे। इंसानी बस्तियों से बचने के लिए बार-बार रास्ता बदला तीनों भाई काफ्यू नेशनल पार्क से निकले। शुरुआत में वे पूर्व की ओर बढ़े और जाम्बिया के औद्योगिक इलाकों की तरफ गए। वे किटवे और एनडोला जैसे शहरों के आसपास पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अपना रास्ता बदला और फिर पूर्व की ओर लुआंगवा नदी घाटी की तरफ बढ़ने लगे। आखिर में वे साउथ लुआंगवा और लोअर जाम्बेजी नेशनल पार्कों के बीच मौजूद एक गेम मैनेजमेंट एरिया यानी आंशिक रूप से संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र तक पहुंचे। यानी इनका सफर किसी सीधी लाइन में नहीं था। इंसानी गतिविधियां जहां ज्यादा मिलीं, वहां उन्हें रास्ता बदलना पड़ा। इसी वजह से करीब 4,100 किमी की यह यात्रा कई अलग-अलग इलाकों से होकर गुजरी। 420 किमी की दूरी, लेकिन सफर 4 हजार किमी का नक्शे पर मायुकुयुकु के तीनों भाइयों के शुरुआती और आखिरी स्थान के बीच सीधी दूरी करीब 260 मील यानी 420 किमी थी। लेकिन असल में उन्होंने करीब 2,485 मील यानी 4 हजार किमी का घुमावदार रास्ता तय किया। वे इंसानी गतिविधियां ज्यादा दिखने वाली जगहों से बचते हुए जंगल और दूसरे प्राकृतिक इलाकों से होकर आगे बढ़ते रहे। करीब 9 महीने तक घूमने के बाद वे अपने जन्म वाले झुंड से काफी दूर निकल गए। नए साथी की तलाश में निकलते हैं युवा कुत्ते अफ्रीकी जंगली कुत्ते झुंड में रहने वाले सामाजिक जानवर हैं। वे साथ मिलकर शिकार करते हैं और बच्चों की देखभाल भी करते हैं। बड़े होने के बाद कई नर और मादा अपने जन्म वाले झुंड से अलग होकर नया इलाका और साथी तलाशते हैं। इस प्रक्रिया को डिस्पर्सल कहा जाता है। डिस्पर्सल, माइग्रेशन से अलग होता है। माइग्रेशन में जानवर आमतौर पर मौसम के हिसाब से भोजन या रहने की जगह की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके जाते हैं और कई बार वापस भी लौटते हैं। वहीं डिस्पर्सल में जानवर नया साथी या नया इलाका खोजने के लिए अपने जन्म वाले झुंड को छोड़ देता है। जंगली कुत्ते आमतौर पर अपने जन्म वाले झुंड में प्रजनन नहीं करते। इसलिए बड़े होने पर उनके सामने दो रास्ते होते हैं। वे अपने झुंड में रहकर इंतजार करें या फिर 2 से 3 साल की उम्र में नया साथी खोजने के लिए बाहर निकल जाएं। जाम्बिया के मायुकुयुकु झुंड के इन तीन भाइयों ने दूसरा रास्ता चुना और नए साथी की तलाश में लंबी यात्रा पर निकल पड़े। सिर्फ इन तीनों को नहीं, 19 समूहों को GPS से ट्रैक किया गया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सिर्फ इन तीन भाइयों की यात्रा पर नजर नहीं रखी। उन्होंने 19 जंगली कुत्तों के समूहों को GPS कॉलर की मदद से ट्रैक किया। इन सभी समूहों ने जाम्बिया के 7 नेशनल पार्कों के अंदर या उनके आसपास आवाजाही की। इनमें से 4 समूह अलग-अलग मौकों पर जाम्बिया की सीमा से कुछ किलोमीटर दूर तक पहुंचे। उनकी गतिविधियां अंगोला, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मलावी और जिम्बाब्वे की सीमाओं के करीब दर्ज की गईं। इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका में जंगली कुत्तों की कई आबादियां पहले के अनुमान से ज्यादा एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने इससे पहले बोत्सवाना, तंजानिया और जिम्बाब्वे में भी जंगली कुत्तों की लंबी दूरी की आवाजाही रिकॉर्ड की है। नई रिसर्च इन मामलों को जोड़कर बताती है कि दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका की ज्यादातर जंगली कुत्तों की आबादियां अभी भी एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। तीन बहनों ने 2,100 किमी से ज्यादा सफर किया, एक फंदे में मारी गई

रिसर्च में एक मादा जंगली कुत्ते की कहानी भी सामने आई। EWD-1355 नाम की यह मादा अपनी दो बहनों के साथ 1,300 मील यानी 2,100 किमी से ज्यादा चली। तीनों ने तीन देशों से होकर यह सफर तय किया। इस दौरान वे जाम्बिया से निकलकर मोजाम्बिक तक पहुंचीं। लेकिन बाद में दक्षिणी जाम्बिया के एक गेम मैनेजमेंट एरिया में EWD-1355 शिकारी के लगाए तार के फंदे यानी स्नेर में फंस गई और उसकी मौत हो गई। यह मामला दिखाता है कि साथी या नए इलाके की तलाश में लंबी दूरी तय करने वाले जंगली कुत्तों के लिए इंसानों की गतिविधियां कितना बड़ा खतरा हैं। EWD-1355 की दोनों बहनों के साथ बाद में क्या हुआ, इसकी जानकारी रिसर्चर्स को नहीं मिल सकी। सड़कें और फंदे बने सबसे बड़ा खतरा तीनों भाइयों ने जंगल, शहर, सड़क और खेती वाले इलाकों को पार कर 4,126 किमी का सफर पूरा कर लिया। लेकिन जंगली कुत्तों के लिए लंबी दूरी तय करना ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं है। असली खतरा तब शुरू होता है, जब उनका रास्ता इंसानी इलाकों से टकराता है। कहीं सड़क उनका रास्ता रोकती है, कहीं खेती और शहर जंगलों को अलग कर देते हैं। कई जगह शिकारी मांस के लिए तार के फंदे भी लगाते हैं। ऐसे ही एक फंदे में फंसकर EWD-1355 नाम की मादा जंगली कुत्ते की मौत हो गई थी, जो अपनी दो बहनों के साथ 1,300 मील से ज्यादा घूम चुकी थी।
फिर भी तीन भाइयों की कहानी एक उम्मीद देती है। इतने बंटे हुए इलाकों के बीच भी वे हजारों किलोमीटर चलकर नया ठिकाना खोज पाए। वैज्ञानिकों के लिए इसका मतलब साफ है कि जंगली कुत्तों को बचाने के लिए सिर्फ जंगल बचाना काफी नहीं, उन जंगलों के बीच रास्ते खुले रखना भी जरूरी है। जंगलों में करीब 6 हजार ही जंगली कुत्ते बचे अफ्रीकी जंगली कुत्ते अफ्रीका के सबसे दुर्लभ शिकारी जानवरों में शामिल हैं। जंगलों में इनकी संख्या करीब 6 हजार ही बची है। इनके लिए खतरा सिर्फ शिकारियों से नहीं है। सड़कें, शहर और खेती उनके रहने वाले इलाकों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट रहे हैं। इससे साथी की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके तक जाना मुश्किल हो सकता है। फिर भी इस रिसर्च में तीन भाइयों का 4 हजार किमी का सफर यह दिखाता है कि ये जानवर इंसानों से बदले हुए इलाकों के बीच भी रास्ता खोज सकते हैं। मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्कॉट क्रील, जो इस रिसर्च के प्रमुख लेखक हैं और 1991 से अफ्रीकी जंगली कुत्तों का अध्ययन कर रहे हैं, इसे सावधानी के साथ उम्मीद जगाने वाला नतीजा मानते हैं। उनके मुताबिक, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में बाड़ से घिरे इलाकों को छोड़ दें तो जंगली कुत्तों की लगभग सभी बड़ी आबादियां एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन उनके मुताबिक तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। जानवर इतनी लंबी दूरी तय कर सकते हैं, लेकिन रास्ते में इंसानों की वजह से पैदा हुए खतरे भी हैं। इनमें सबसे बड़ा खतरा शिकारियों के लगाए फंदों का है।
वैज्ञानिक बोले- जंगलों के बीच रास्ते बचाना जरूरी

मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और रिसर्च के प्रमुख लेखक स्कॉट क्रील 1991 से अफ्रीकी जंगली कुत्तों का अध्ययन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस रिसर्च से उम्मीद की एक वजह सामने आई है। पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में बाड़ से घिरे इलाकों को छोड़ दें तो जंगली कुत्तों की ज्यादातर बड़ी आबादियां अब भी एक-दूसरे तक पहुंच सकती हैं। यानी इनके बीच आवाजाही पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। नए इलाके और साथी की तलाश में कोई झुंड सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर तक जा सकता है और दूसरी आबादी से जुड़ सकता है। लेकिन इसके लिए रास्ते बचे रहना जरूरी है। अगर दो जंगलों के बीच सड़कें, शहर और खेती का इलाका लगातार बढ़ता जाए, तो जानवरों की यह आवाजाही मुश्किल हो जाएगी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब में 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिला सऊदी अरब के मदीना इलाके में करीब 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिला है। यहां यूरेनियम के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स भी पाए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *