नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड में 97 साल की गुना माया बोहरा करीब 4 घंटे तक मलबे में दबी रहीं। नुवाकोट के देविघाट में नदी किनारे बने बुजुर्ग देखभाल केंद्र की ग्राउंड फ्लोर पर वह अपने कमरे में थीं। बाढ़ का पानी ग्राउंड फ्लोर तक पहुंचा और गुना माया को बहाकर एक किनारे तक ले गया, जहां पानी का बहाव कम था। उनके रिश्तेदार भी JCB लेकर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू में सेना और पुलिस की मदद की। गुना माया को काठमांडू के बीर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रेस्क्यू के बाद वह बहुत कम बोलती हैं और बार-बार एक ही सवाल पूछती हैं- “पानी ने मुझे क्यों मारा?” नेपाल में इस बाढ़ से अब तक 1,243 लोगों की मौत हो चुकी है। भोटेकोशी नदी के रास्ते और अंडरग्राउंड पावरहाउस की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश अब भी जारी है। नेपाल त्रासदी से जुड़ी 5 तस्वीरें… शवों की पहचान के लिए DNA जांच की जा रही है, ये कैसे होती है और भारत इसमें क्या मदद कर रहा है, जानिए भास्कर नॉलेज में
सवालः नेपाल को भारत कैसे मदद कर रहा है? जवाबः भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है। यह टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस और स्थानीय एक्सपर्ट्स के साथ काम कर रही है। टीम शवों से DNA सैंपल लेने, उनकी जांच और परिजन के DNA से मिलान में तकनीकी मदद कर रही है। सवालः DNA जांच से पहचान कैसे होती है? जवाबः DNA हमारे शरीर का ऐसा जेनेटिक कोड है, जो माता-पिता से मिलता है। जुड़वां बच्चों को छोड़ दें तो हर व्यक्ति का DNA अलग होता है। बुरी तरह क्षतिग्रस्त शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स हड्डी या दांत से DNA सैंपल लेते हैं और उसे लापता व्यक्ति के परिजन के DNA से मिलाते हैं। इससे पहचान की सबसे भरोसेमंद पुष्टि होती है। सवालः DNA जांच में कितना समय लगता है? जवाबः आमतौर पर DNA जांच में 1 से 3 सप्ताह लग सकते हैं। लेकिन आपदा के दौरान ज्यादा सैंपल होने से समय बढ़ सकता है। नई तकनीकों से कुछ मामलों में 24 से 72 घंटे में भी रिपोर्ट मिल सकती है। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

