यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई तेज हो गई है। इस बीच ब्रिटेन ने सऊदी को मदद देने का फैसला किया है। सोमवार को न्यूयॉर्क जाते समय पत्रकारों से बात करते हुए ब्रिटिश पीएम एंडी बर्नहैम ने कहा ब्रिटेन एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर देगा। यानी हवा में उड़ते सऊदी लड़ाकू विमानों में ईंधन भरा जा सकेगा। इधर लड़ाई का असर आम लोगों पर पड़ रहा है। UN के मुताबिक, लड़ाई बढ़ने से अब तक 1.2 लाख से ज्यादा यमन के लोग बेघर हो चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में 3,000 से ज्यादा यमनी शरणार्थी लाल सागर पार कर जिबूती पहुंचे हैं। ब्रिटेन वॉयजर टैंकर विमान भेज सकता है ब्रिटेन सऊदी अरब की मदद के लिए एक ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) का वॉयजर टैंकर विमान भेज सकता है। यह विमान साइप्रस में मौजूद RAF अक्रोटिरी एयरबेस से काम करेगा। वॉयजर विमान का काम हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमानों में ईंधन भरना है। इससे लड़ाकू विमान बिना नीचे उतरे ज्यादा देर तक उड़ सकते हैं। ब्रिटेन की वायुसेना के पास ऐसे 9 वॉयजर विमान हैं। इनमें 8 सैन्य इस्तेमाल के लिए हैं और एक विमान सामान्य यानी सिविलियन रजिस्ट्रेशन वाला है। जरूरत पड़ने पर उसे भी सैन्य काम में लगाया जा सकता है। सऊदी अरब को दी जा रही यह मदद कुछ हफ्तों के लिए होगी। ब्रिटेन इस साल पहले ही सऊदी अरब में स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर चुका है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल जैसे हवाई हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होता है। हूती तेजी ने लाल सागर के तट के पास अहम द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूतियों ने इस महीने लाल सागर के तट की ओर तेजी से बढ़ते हुए बाब-अल-मंदब स्ट्रेट के पास के इलाकों पर कब्जा किया है। यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसलिए इस इलाके में लड़ाई का असर समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है। हूतियों की इस बढ़त के बाद सऊदी अरब ने तटीय इलाकों में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं। दूसरी तरफ हूतियों ने सऊदी अरब के शहरों और बुनियादी ढांचे पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है। जिबूती युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता यमन के ठीक सामने स्थित जिबूती ने साफ किया है कि वह हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। हालांकि, जिबूती अफ्रीका के सबसे ज्यादा सैन्य मौजूदगी वाले देशों में से एक है। 2003 से अमेरिका यहां कैंप लेमोनियर नाम का बड़ा सैन्य बेस चला रहा है। यहां चीन का भी बड़ा सैन्य बेस है। सऊदी पर हूतियों के हमले क्यों बढ़े? यह लड़ाई यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच है। हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले करने का दावा किया है। इसके जवाब में सऊदी अरब ने यमन के अंदर हूती ठिकानों पर हमले किए हैं। ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, जुलाई से हूतियों ने सऊदी अरब के कई शहरों, एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इनमें अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू शामिल हैं। लाल सागर में सऊदी जहाजों को भी निशाना बनाया गया है। 2014 से चल रही है यमन में जंग यमन में 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है। एक तरफ हूती लड़ाके हैं और दूसरी तरफ यमन की सरकार के समर्थन में लड़ने वाली सेनाएं हैं। सऊदी अरब भी यमन की सरकार का समर्थन करता है। 2022 में UN की कोशिश से दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह सीजफायर टूट गया। इसके बाद फिर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले होने लगे। यमन के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट है। यहां से लाल सागर के रास्ते कई जहाज गुजरते हैं। इसलिए यहां लड़ाई बढ़ने का असर दूसरे देशों के कारोबार और जहाजों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। ब्रिटेन पहले भी हूतियों पर हमला कर चुका है ब्रिटेन पहले भी हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है। जनवरी 2024 में ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूतियों के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हूतियों के लगातार हमलों के बाद की गई थी।अभियान में ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों को वॉयजर टैंकर विमानों से हवा में ईंधन दिया गया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में भी ब्रिटेन और अमेरिका ने यमन में हूतियों के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इसमें ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों ने हूतियों के ड्रोन बनाने वाली एक जगह को निशाना बनाया था। इस अभियान में भी टाइफून विमानों को वॉयजर टैंकर से हवा में ईंधन दिया गया था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की: अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पडील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…

