अलीगढ़। प्रख्यात संत एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अलीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मथुरा, काशी और संभल को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “मथुरा, काशी और संभल लेकर रहेंगे, इस विषय पर कोई समझौता नहीं होगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रामभद्राचार्य ने अलीगढ़ के नाम परिवर्तन की भी वकालत करते हुए कहा कि अलीगढ़ का नाम ‘हरिगढ़’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं और समाज से लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए जागरूक रहना होगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग मौजूद रहे। रामभद्राचार्य के बयान के बाद विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर बहस लगातार जारी है। रामभद्राचार्य ने कहा कि उनके विचार सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जुड़े हैं तथा इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

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