अलीगढ के लोधा थाना इलाके के एक गांव की रहने वाली छात्रा को शादी करने का झांसा देकर 18 जून 2024 को बहला फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ( पॉक्सो कोर्ट – 2 ) की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया है। दोषी को अदालत ने 5 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। खास बात ये है कि दोषी को अदालत ने रेप के आरोप से साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया है। मामले की जानकारी एडीजीसी लव कुमार बंसल व संजय शर्मा ने दी ।

एडीजीसी ने बताया कि पीड़ित छात्रा अपनी दादी के साथ गांव में रहती थी । जबकि उसके पिता व अन्य परिवार के सदस्य टप्पल क्षेत्र में रहते थे । पिता एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे। पीड़िता क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में 11 कक्षा में पढ़ती थी ।
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पिता ने लोधा थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करवाया। इसमें बताया कि घटना वाले दिन करीब साढ़े 6 बजे ( शाम ) करन निवासी गांव कस्टली बहला फुसलाकर भगा ले गया । मां ने भगाकर ले जाते वक्त करन को देखा था । मां ने रोकने की भी कोशिश की थी। इसकी जानकारी उसको तब हुई जब वह घर आया था । पीड़िता को काफी तलाश किया, लेकिन उसकी कोई जानकारी नहीं मिली । इसके बाद उसने पुलिस से सम्पर्क किया ।
इधर, पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ महीने बाद पीड़िता और करन को गांव वीरमपुर चौराहे के पास से पकड़ लिया । पुलिस पीड़िता के बयान दर्ज करने के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए दीनदयाल अस्पताल लेकर गई । लेकिन पीड़िता ने मेडिकोलीगल कराने से मना कर दिया ।

पुलिस ने पीड़िता को अदालत में पेश कर उसके बयान करवाये । उसने बताया कि करन उसको पलवल लेकर गया था। यहां 4 दिन दोंनो रुके थे । लेकिन शादी नहीं की थी । करन उसे शादी की बात कहकर ले गया था। दोंनो दोस्त की तरह रहे थे । इसके बाद दिल्ली के महिपालपुर में करीब डेढ़ महीने रहे । वहां पर दोंनो के मध्य शारीरिक सम्बंध स्थापित नहीं हुए थे, न दोंनो पति पत्नी की रूप में रहे थे ।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया। मुकदमें में जांच कर चार्जशीट अदालत में पेश की । अदालत ने दोंनो पक्षों सुना और साक्ष्य व गवाहों के आधार पर करन को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है और जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना की रकम जमा न करने पर 1 महीने अतिरिक्त कारावास भोगने का आदेश भी दिया है। वहीं, अदालत ने आदेश दिया है कि दोषी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाए ।

