ईरान की करेंसी रियाल मंगलवार को अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। 1 डॉलर खरीदने के लिए 25 लाख रियाल देने पड़ रहे हैं। जंग शुरू होने से पहले 27 फरवरी को 1 डॉलर के बदले करीब 17 लाख रियाल मिल रहे थे। यानी कि सिर्फ 7 महीने में ईरान की करेंसी करीब 50 फीसदी तक गिर गई है। ईरान के केंद्रीय बैंक की आधिकारिक दर करीब 16.5 लाख रियाल प्रति डॉलर है। हालांकि आम लोगों को डॉलर बाजार की दर पर ही मिलता है। डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत गिरने की बड़ी वजह युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध और ईरानी तेल पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी है। इससे ईरान की कमाई और डॉलर की उपलब्धता पर असर पड़ा है, जिससे रियाल लगातार कमजोर हो रहा है। अमेरिका ईरान की कमाई के 3 बड़े रास्ते रोक रहा 1. तेल से होने वाली कमाई पर चोट ईरान की विदेशी कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है। इसलिए अमेरिका ईरानी तेल खरीदने वाली कंपनियों, टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क पर लगातार प्रतिबंध लगा रहा है। ईरान के तेल का बड़ा हिस्सा चीन जाता है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, चीन ईरान के करीब 90% तेल निर्यात का खरीदार है। इसलिए अमेरिका उन चीनी रिफाइनरियों और कारोबारियों पर भी कार्रवाई कर रहा है, जो ईरानी तेल खरीदते हैं। 2. तेल का पैसा ईरान तक पहुंचना मुश्किल बनाना सिर्फ तेल की बिक्री रोकना काफी नहीं है। तेल बेचकर जो पैसा मिलता है, वह ईरान तक पहुंचे, इसे रोकना भी जरूरी है। इसके लिए अमेरिका ईरानी बैंकों, करेंसी एक्सचेंज और ‘शैडो बैंकिंग’ नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहा है। ये ऐसे नेटवर्क हैं, जिनमें अलग-अलग देशों की कंपनियों, बैंकों और बिचौलियों के जरिए ईरान के पैसे को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में घुमाया जाता है। अगस्त में अमेरिका ने ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की थी, जिन पर ईरान के लिए सैकड़ों करोड़ डॉलर की रकम इधर-उधर करने का आरोप था। 3. दूसरे देशों के बैंकों और कंपनियों पर भी कार्रवाई अमेरिका का दबाव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। अगर कोई विदेशी बैंक या कंपनी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले ईरान से जुड़े कारोबार में मदद करती है, तो अमेरिका उसके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है। इसे सेकेंडरी सैंक्शंस कहा जाता है। रियाल गिरने से ईरान में क्या दिक्कतें बढ़ीं? 1. रोजमर्रा का सामान बहुत महंगा हो गया रियाल कमजोर होने से खाने-पीने की चीजों और दूसरी जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं। रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में ईरान में सालाना महंगाई 66% थी, जबकि खाने की कीमतें एक साल में 128% बढ़ी थीं। 2. एक ही पैसे में कम सामान मिल रहा अल जजीरा के मुताबिक जंग से 20 लाख रियाल में करीब 4 किलो टमाटर, आधा किलो चिकन और करीब 1 लीटर खाना पकाने का तेल मिल जाता था। अगस्त में इतनी ही रकम में इन चीजों की करीब आधी मात्रा ही मिल रही थी। टमाटर 71%, चिकन 74% और खाना पकाने का तेल 177% महंगा हो चुका था। 3. दवाएं महंगी और कम मिल रही हैं ईरान में करीब 800 दवाओं की कमी बताई गई है, जिनमें 90 जरूरी और जीवन रक्षक दवाएं हैं। इंसुलिन की कीमत एक साल में करीब 6 गुना तक बढ़ गई। पैरासिटामोल 93% और दूसरी कई दवाओं के दाम भी काफी बढ़े हैं। 4. नौकरियों पर भी असर पड़ा है रॉयटर्स के मुताबिक वसंत में ईरान की बेरोजगारी दर 9.1% थी और एक साल में काम करने वालों की संख्या करीब 4.5 लाख घट गई। युद्ध के कारण निर्माण, उद्योग और दूसरे कारोबारों में भी काम प्रभावित हुआ है। कई साल से प्रतिबंधों के दबाव में है ईरान ईरान की अर्थव्यवस्था कई साल से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। युद्ध शुरू होने के बाद नए प्रतिबंधों और ईरानी तेल पर अमेरिकी नाकाबंदी ने संकट को और बढ़ा दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार देर रात ईरानी मीडिया से कहा कि इस समय पूरा ध्यान होर्मुज स्ट्रेट पर है। यह जलमार्ग युद्ध के केंद्र में है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज पर बातचीत अब ज्यादा गंभीर हो गई है। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ लड़ाई खत्म करने और होरमुज को फिर खोलने के लिए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया अमेरिकी अधिकारियों ने AP को बताया कि बातचीत की कोशिशें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के ईरानी प्रस्ताव ठुकराने के बाद भी जारी हैं। ट्रम्प ने शनिवार को ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है। ईरान ने 7 दिन में होर्मुज खोलने का प्लान दिया था ईरान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के जरिए कतर के जरिए अमेरिका को 7 दिन का रोडमैप भेजा था। इसमें लड़ाई रोकने और शर्तें पूरी होने पर होर्मुज खोलने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के तहत ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की गई थी। इसके साथ ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग भी की थी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————

